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CBI VS ममता, पूरी कहानी।

CBI की टीम कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर शारदा चिट फंड मामले में छापा मारने पहुची थी, लेकिन कोलकाता ने पुलिस ने CBI के अधिकारियों के साथ धक्का मुक्की की और फिर उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया । कुछ घंटों के बाद CBI और ED के दफ्तरों को भी घेर लिया । CBI अधिकारियों ने फिर राज्यपाल KC नाथ त्रिपाठी से संपर्क किया। फिर ममता के इशारों पर जैसे ही कोलकाता पुलिस पीछे हटी , CBI दफ्तर के बाहर CRPF तैनात कर दी गयी और CBI अधिकारियों को थानों से रिहा कराया गया । उसके बाद ममता बनर्जी मेट्रो चैनल मेट्रो स्टेशन के पास धरने पर बैठ गई। ममता ने कहा कि यह केंद्र के द्वारा लगाई गई इमरजेंसी है। CBI इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुच गयी ।

इस घटना को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी दलों ने हंगामा भी किया । राज्यसभा में टीएमसी सांसद डेरेक ओब्राइम ने नियम 267 के तहत विवाद पर चर्चा के लिए नोटिस दिया, जिसका समर्थन भी मिला विपक्षी दलों के द्वारा। इस पर राज्यसभा में बहस के बीच हंगामा हुआ फिर बाद में राज्यसभा कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। लोकसभा मे भी हंगामा हुआ और लोकतंत्र बचाओ के नारे लगाए गए । टीएमसी सांसद स्वागत राय ने CBI के दुरूपयोग का मुद्दा उठाया तो बाकी दलो ने भी उनका साथ दिया । गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जवाब भी दिया जिसके बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने सवाल उठाए फिर जमकर हंगामा हुआ।
ममता के साथ खुद को ईमानदारी का सर्टिफिकेट देने वाले अरविंद केजरीवाल सहित , चंद्रबाबू नायडू , और अखिलेश यादव आए। ये वही अरविंद केजरीवाल थे जिनके पोलिटिकल पिता अन्ना हजारे भी 2019 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर धरने पर जंतर मंतर पर बैठा था, लेकिन उसके धरने को दरकिनार कर केजरीवाल अपनी ही तरह की ईमानदार नेता ममता का साथ देना मुनासिब समझा।
टीएमसी के गुंडे जिन्हें आम तौर पर ममता कार्यकर्ता कहती है जो ममता का साथ हर परस्थितियों में देते हो चाहे बीजेपी के कार्यकर्ताओं का कत्ल करने हो या फिर चुनाव में ममता के खिलाफ खड़े हुए कैंडिडेट की हत्या की साजिश या फिर उन्हें लहूलुहान करना हो या फिर जबरदस्ती कर के वोट लेना हो। ये कार्यकर्ता बंगाल में ट्रेन की आवाजाही को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे है।
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पूछा की आखिर कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार में ऐसी क्या बात है जो ममता उसे बचाने की कोशिश कर रही है और उस से सिर्फ पूछ ताछ होने पर पश्चिम बंगाल सरकार धरने पर बैठ गयी ?
ममता सरकार शारदा घोटाले में फसने वालो को संरक्षण दे रही है । इस घोटाले में ममता सरकार के कई मंत्रियों के फसने की भी आसंका है । सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर ममता को फटकार लगाई है और कहा है कि ममता को अगर पूछ ताछ से परेशानी है तो वो कोलकाता हाई कोर्ट जा सकती है और पुलिस कमिश्नर को CBI के समक्ष पेश होने को कहा है। CBI का कहना है कि पूछ ताछ के लिए नोटिस भेजा गया था उसके बाद छापा मारा गया है।
ममता ने इस मामले की तुलना एमरजेंसी से की है । गौरतलब है कि देश मे जिस भी राज्य में गैर बीजेपी सरकरो है उन राज्यों में CBI को घुसने से रोक लगा दिया गया है। ताकि उन सरकारों और उनके भ्रष्ट मंत्रियों पर किसी भी प्रकार खतरा ना आने पाए और घोटाले करने में आसानी हो।

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