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ममता का साथ देने वाले अधिकारियों के खिलाफ होगी बड़ी कार्यवाही

आज एक तरह जहा रोबर्ट वाड्रा से इडी ने पूछ ताछ की वही दूसरी तरह ममता का साथ देने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही होने की भी खबर आ रही है। रोबर्ट वाड्रा के सामने 42 सवाल रखे गए तजे जिनका जवाब देना काफी मुश्किल हो गया था लैंड माफिया रोबर्ट वाड्रा के लिए। बाद में वाड्रा ने इसे राजनीतिक रजिंश बताने की पूरी कोशिश की थी मीडिया के सामने।
दूसरी तरफ ममता और सीबीआई के युद्ध मे नई खबर सामने आ रही है । खबर है कि केंद्र के खिलाफ धरना देने वाले 5 आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। ये वही अधिकारी है जो ममता का साथ देते हुए उनके साथ सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे थे। गौरतलब है ममता ओर सीबीआई के बीच चल रही तीखी नोक झोक में ममता ने पुलिस कमिश्नर को बचाने की कोशिश की थी और बाद में मोदी सरकार पर सरकारी संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगा कर सहानुभूति बटोरने की पूरी कोशिश की थी। अब उन अधिकारियों को धरना देना भारी पड़ गया है । ममता के साथ शामिल 5 अधिकारियों पर कार्यवाही की जाएगी, उनके मेडल वापस लिए जाएंगे और उन्हें बार किया जाएगा किसी भी सेंट्रल डेपुटेशन से।
उन पांच अप्सरो में पश्चिम बंगाल वेस्ट के डीजीपी वीरेंद्र जो 1985 बैच के है , विनीत कुमार जो 1984 बैच के है। एडीजी डिरेक्टर सेक्युरिटी अनुज शर्मा 1991 बैच से है, एडीजी ज्ञानवंत सिंह है जो कि विदानगर के कमिश्नर है उनके साथ एक और कमिश्नर है सुप्रथम सरकार जो कि 1997 बैच के अधिकारी है। इन पांच अधिकारियों पर कार्यवाही की जानी है। ये सभी ममता के साथ धरना देने में शामिल थे।
कोलकाता पुलिस कमिश्नर जो कि अपनी वर्दी के धरना देते पाए गए है । वर्दी में किसी भी धरने में शामिल होना नियमो के खिलाफ है। यह कारवाही राज्यपाल के द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के तहत की जा रही है। एक कोलकाता पुलिस कमिश्नर को बचाने के लिए ये सारे ऑफिसर संविधान के नियमो को तक पर रख कर धरना देने पहुचे थे। ये सारे वरिष्ठ अधिकारी है जो कि 1997 से ले कर 1984 तक के अधिकारी है। इनके खिलाफ कार्यवाही लाज़मी है। इस मामले पर प्रधानमंत्री का बोलना अभी बाकी है । इस घटना पर प्रधानमंत्री का भाषण आज होना है । नियमो की माने तो एक छोटे से छोटा अधिकारी भी धरने पर नही बैठ सकता है।
इस मामले में राज्यपाल ने होम मिनिस्ट्री को रिपोर्ट सौंपी थी जिस पर सिलसिलेवार तरीके से बात चीत करने के बाद कार्यवाही का फैसला लिया गया है। इस से यह साबित हो गया है कि अगर कोई भी अधिकारी या मुख्यमंत्री असंवैधानिक तरीके से किसी को बचाने की कोशिश करेगा उसकी खैर नही है। नेता और पैड से बढ़कर संविधान है जिसका पालन सभी को करना है चाहे वह राज्य का मुख्यमंत्री हो चाहे वह कोई अधिकारी हो ।

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